चित्तौड़गढ़ दुर्ग राजपूत शौर्य, बलिदान और स्थापत्य कला का अनुपम उदाहरण है। यह न केवल राजस्थान बल्कि भारतीय इतिहास की गौरवगाथा है।
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1. सामान्य परिचय
- अन्य नाम: चित्रकूट, सिरमौर दुर्ग, राजस्थान का गौरव, दक्षिणी-पूर्वी द्वार, “दुर्गों का दुर्ग”।
- अबुल फजल का कथन: “गढ़ तो चित्तौड़गढ़, बाकी सब गढ़या।”
- क्षेत्रफल: 8 किमी (लंबाई) × 2 किमी (चौड़ाई) – राजस्थान का सबसे बड़ा दुर्ग।
- स्थान: गम्भीरी व बेड़च नदी के संगम पर, मेसा पठार (व्हेल मछली के आकार का)।
- यूनेस्को विश्व धरोहर: 21 जून, 2013 को शामिल।
- डाक टिकट: दिसंबर 2018 में ₹12 का टिकट जारी।
2. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
निर्माण एवं शासक
- 7वीं शताब्दी: मौर्यवंशी राजा चित्रांगद द्वारा निर्मित।
- आधुनिक निर्माता: राणा कुम्भा (15वीं शताब्दी)।
- सामरिक महत्व: चित्तौड़गढ़ दुर्ग दिल्ली-मालवा-गुजरात मार्ग पर स्थित।
प्रमुख आक्रमण एवं शाके
- 1303 ई.: अलाउद्दीन खिलजी vs. रावल रतन सिंह (रानी पद्मिनी का जौहर)।
- 1535 ई.: गुजरात के बहादुरशाह vs. विक्रमादित्य (रानी कर्मावती का जौहर)।
- 1567-68 ई.: अकबर vs. महाराणा उदय सिंह (जयमल-फत्ता का बलिदान)।
अन्य ऐतिहासिक तथ्य
- चित्तौड़गढ़ दुर्ग एकमात्र दुर्ग था जहाँ कृषि होती थी।
- जौहर मेला: प्रतिवर्ष चैत्र कृष्ण एकादशी को आयोजित।
3. चित्तौड़गढ़ दुर्ग की संरचना
प्रवेश द्वार (7 पोल)
- पाडन पोल: भैंसे की कथा से जुड़ा, देवलिया के बाघसिंह की छतरी यहाँ है।
- भैरव पोल: कल्ला राठौड़ (4 खंभे) व जयमल (16 खंभे) की छतरियाँ।
- हनुमान पोल: हनुमान मंदिर के निकट।
- गणेश पोल: गणेश जी को समर्पित।
- जोड़ला पोल: छठे द्वार से जुड़ा।
- लक्ष्मण पोल: लक्ष्मण मंदिर के पास।
- राम पोल: अंतिम द्वार, फत्ता सिसोदिया का स्मारक यहाँ है।
- उत्तरी द्वार: लाखेटा बारी (1567 में अकबर का मोर्चा)।
जल संरचनाएँ
- तालाब: भीमतल, जयमल-फत्ता तालाब, सूर्यकुंड।
- बावड़ियाँ: घी-तेल बावड़ी, कातण बावड़ी, गौमुख कुंड।
4. प्रमुख स्मारक एवं मंदिर
स्तंभ
- विजय स्तंभ (कीर्ति स्तंभ)
- निर्माण: 1440-48 ई. में राणा कुम्भा द्वारा मालवा विजय के उपलक्ष्य में।
- ऊँचाई: 122 फीट, 9 मंजिला, 157 सीढ़ियाँ।
- विशेषताएँ:
- मूर्तिकला का अजायबघर (हिंदू देवी-देवताओं की 500+ मूर्तियाँ)।
- आठवीं मंजिल पर कोई मूर्ति नहीं।
- तीसरी मंजिल पर “अल्लाह” 9 बार अंकित।
- उपनाम:
- कुतुबमीनार से श्रेष्ठ – जेम्स टॉड
- विष्णु ध्वज – उपेंद्रनाथ डे
- हिन्दू प्रतिमा शास्त्र की अनुपम निधि – आर. पी. व्यास
- रोम के टार्जन के समान – फर्ग्युसन
- संगीत की भव्य चित्रशाला – डॉ. सीमा राठौड़
- पौराणिक देवताओं का अमूल्य कोष – गोरीशंकर हीराचंद ओझा
- लोकजीवन का रंगमंच – गोपीनाथ शर्मा
- जैन कीर्ति स्तंभ
- निर्माण: 12वीं शताब्दी में जैन व्यापारी जीजा द्वारा।
- ऊँचाई: 75 फीट, 7 मंजिला, आदिनाथ को समर्पित।
चित्तौड़गढ़ दुर्ग के मंदिर
- समिद्धेश्वर मंदिर
- निर्माण: मालवा के राजा भोज (1011-55 ई.), नागर शैली।
- पुनर्निर्माण: मोकल द्वारा (मोकल मंदिर भी कहलाता है)।
- कालिका माता मंदिर
- मूलतः: 8वीं शताब्दी में सूर्य मंदिर (मानमौरी मौर्य द्वारा)।
- 12वीं शताब्दी: कालिका माता की मूर्ति स्थापित।
- कुंभश्याम मंदिर
- मूलतः शिव मंदिर, बाद में विष्णु मंदिर।
- पंचायतन शैली में राणा कुम्भा द्वारा पुनर्निर्मित।
- श्रृंगार चंवरी मंदिर
- इतिहास: कुम्भा की पुत्री रमाबाई की शादी की चंवरी।
- वर्तमान: जैन शांतिनाथ मंदिर।
5. महल एवं हवेलियाँ
- पद्मिनी महल: रानी पद्मिनी से जुड़ा।
- कुम्भा महल (नवलखा महल): पन्नाधाय ने यहाँ चंदन को बलिदान दिया।
- जयमल-फत्ता की हवेलियाँ: वीर योद्धाओं की स्मृति।
- फतेह महल, भामाशाह की हवेली: ऐतिहासिक महत्व।
6. विशेष तथ्य
- मोहर मगरी: अकबर द्वारा निर्मित कृत्रिम टीला (प्रत्येक मजदूर को एक मोहर प्रति टोकरी)।
- रथ मार्ग: राणा कुम्भा द्वारा बनवाया गया।
- राजस्थान पुलिस व शिक्षा बोर्ड का प्रतीक चिह्न विजय स्तंभ है।